Sunday, October 21, 2007

जीवनचर्या

पोरों में
सहेज ली
रास्तों की गर्द

दिल में
रख ली
दिन भर की थकान

पलकों पे
ओढ़ ली
उम्र भर की नींद

खेला किये
सपनों से
और जी गए एक उम्र

No comments: