समय पिघला तो, बह चला
बह चली संसृति
न बहा मैं....
सब कहते हैं - योगी होगा
मैं हस देता हूँ
बहता नहीं प्रवाह में
आवृत्ति अवश्य सुनता हूँ
जीवन के स्पंदन की
पर ध्यान नहीं देता
खोया रहता हूँ उत्सव में
तुम और तुम्हारा प्रेम
विगत तुम भी आओ
1 week ago
wool-gathering of wandering minds
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