आसमान पिघल गया
सूरज की गर्मी से
और धरा को लाज भी नहीं आयी
मुई अमावस को
चाँद के घर चोरी हुई
और चोर के पैरों के निशान ही नहीं !
- टिटहरी चीखती रही
- तारे आँखें मींचे रहे
- रात अपने आँचल में सिमटी रही
चाँद यूँ ही पिघल गया
तारे रोये नहीं
और रात को तो पता भी न चला
नदी बहती रही हवा में
जुगनू अवश्य चौंकते रहे
- इंतज़ार में
पर किसी को कुछ पता नहीं
1 day ago
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