उम्र से लंबी रात में भी एक पल का न गुज़रना
अजीब दास्ताँ है यारों उम्र का इस तरह गुज़रना
अजीब दास्ताँ है यारों उम्र का इस तरह गुज़रना
एक बार हाँ करके उनका बार बार मुक़रना
हसीन दास्ताँ है यारों उनका इस तरह मुक़रना
उनका तसव्वुर, उनकी ही बातें और उनका ख़याल
दिलचस्प दास्ताँ है बेखुदी में कायनात का ठहरना
नज़रें मिलीं जो उनसे, तो फिसली और ग़ुम हो गयीं
तारीखी था विसाले-ए-यार, तारीखी हुआ बिछड़ना
हसीन दास्ताँ है यारों उनका इस तरह मुक़रना
उनका तसव्वुर, उनकी ही बातें और उनका ख़याल
दिलचस्प दास्ताँ है बेखुदी में कायनात का ठहरना
नज़रें मिलीं जो उनसे, तो फिसली और ग़ुम हो गयीं
तारीखी था विसाले-ए-यार, तारीखी हुआ बिछड़ना
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