Tuesday, July 7, 2015

एक खुशी चोरी की

एक जेब में धूप
एक में पानी
टोकरी में आसमान
लेकर मैं खुश था


एक सुबह लेकर निकला
एक शाम लेकर लौटा
दिन भर जो व्यापार किया
शाम की अंटी में बांध लिया


एक सुबह नम थी
आसमान थोड़ा सा झुका था
मैंने उचक के सूरज तोड़ लिया
दूसरा सूरज उगा या नहीं
यह तो पता नहीं पर मैं खुश हूँ

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