Monday, February 13, 2017

यादें

गिल्ली डंडे का खेल
कबड्डी की धक्कम पेल
यादें, कुश्तियों के दांव 

ढेर सारे कंचे
ढेर सारी ऊधम
यादें, यार दोस्त बिंदास
पटाखों की जंग
होली के रंग
यादें, साजिंदों के साज़

जाड़े की नरम धूप
मथानी की थिरकन
यादें, मक्खन और छाछ

शर्मीली तितलियाँ
ढीठ मक्खियां
यादें, कनखजूरों की खाज

गोधूलि पे घर लौटते ढोर
धूल और उनके शोर 
यादें, घर और माँ की आवाज़

1 comment:

VISHAL said...

Nostalgic, Down the memory lane