उधार की धूप में
तसल्ली की छाँव
पराये गाँव में
अपनेपन की एक ठाँव
अकेलेपन की ठंड में
रिश्तों के अलाव
मिल जाए कहीं तो
आवाज़ दे देना
खिल जाए उम्मीद तो
आवाज़ दे देना
तसल्ली की छाँव
पराये गाँव में
अपनेपन की एक ठाँव
अकेलेपन की ठंड में
रिश्तों के अलाव
मिल जाए कहीं तो
आवाज़ दे देना
खिल जाए उम्मीद तो
आवाज़ दे देना
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