चाह यही
बन पराग उड़ जाऊं
खुशबू संग
बस जाऊं तेरे मन में
वैराग्य न लूंगा
तप अवश्य करता हूँ
नाम तेरा ही सुमिरन कर
जप करता हूँ
चाह यही कि विघटित हो जाऊं
कण कण में
बस जाऊं तेरे मन में
मैं मृत्युञ्जय!
चाह नहीं बनने की
ना ही कोई
नया इतिहास रचने की
चाह यही बस कवलित हो जाऊं
पल पल में
बस जाऊं तेरे मन में
बन पराग उड़ जाऊं
खुशबू संग
बस जाऊं तेरे मन में
वैराग्य न लूंगा
तप अवश्य करता हूँ
नाम तेरा ही सुमिरन कर
जप करता हूँ
चाह यही कि विघटित हो जाऊं
कण कण में
बस जाऊं तेरे मन में
मैं मृत्युञ्जय!
चाह नहीं बनने की
ना ही कोई
नया इतिहास रचने की
चाह यही बस कवलित हो जाऊं
पल पल में
बस जाऊं तेरे मन में