अमंत्रं अक्षरं नास्ति , नास्ति मूलं अनौषधं ।
अयोग्यः पुरुषः नास्ति, योजकः तत्र दुर्लभ: ॥
— शुक्राचार्य
अयोग्यः पुरुषः नास्ति, योजकः तत्र दुर्लभ: ॥
— शुक्राचार्य
हिंदी अनुवाद -
कोई अक्षर ऐसा नही है जिससे (कोई) मंत्र न शुरु होता हो, कोई ऐसी जड़ नही है, जिससे कोई औषधि न बनती हो
कोई अक्षर ऐसा नही है जिससे (कोई) मंत्र न शुरु होता हो, कोई ऐसी जड़ नही है, जिससे कोई औषधि न बनती हो
कोई भी पुरुष अयोग्य नही होता, उससे काम लेने वाले (आज के सन्दर्भ में - मैनेजर) ही दुर्लभ हैं।
(कहीं इन्टरनेट पर पढ़ा था, अभी याद नहीं कहां)
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