1
याद
यादों की बरफी बनायी
चख के देखी
मीठी थी
बेच ली
2
स्वागत
तुम्हारा स्वागत है
मेरे एकाकी जीवन में
आओ हम तुम मिलकर
एक ऐसा गीत गायें
जिसमें मिलन का बोध हो
3
और फिर।।।।
शब्द झरे तो बह चले
बह चला समय
न तो शब्द थमे
न समय
और न ही नियति
4
ख़बर
जनवरी 10
उस आदमी को
जिसे एक कुत्ते ने काट लिया था
नगरपालिका वाले पकड़ ले गये
और बधिया कर दिया
6
कैसे
मैं नहीं समझ पाता
कि कोई कैसे निकल जाता है
ज़िन्दगी की जद्दोजहद से
जीते जी
याद
यादों की बरफी बनायी
चख के देखी
मीठी थी
बेच ली
2
स्वागत
तुम्हारा स्वागत है
मेरे एकाकी जीवन में
आओ हम तुम मिलकर
एक ऐसा गीत गायें
जिसमें मिलन का बोध हो
3
और फिर।।।।
शब्द झरे तो बह चले
बह चला समय
न तो शब्द थमे
न समय
और न ही नियति
4
ख़बर
जनवरी 10
उस आदमी को
जिसे एक कुत्ते ने काट लिया था
नगरपालिका वाले पकड़ ले गये
और बधिया कर दिया
6
कैसे
मैं नहीं समझ पाता
कि कोई कैसे निकल जाता है
ज़िन्दगी की जद्दोजहद से
जीते जी