Saturday, October 31, 2009

नयी रचना

रिश्तों की बानगी
बनने से पहले
पत्तों के खेल में
नहले पे देहले...

Thursday, July 30, 2009

हरसिंगार के फूल

रात
हरसिंगार के फूल खिले
महकते रहे रात भर

भोर
सब झर गए
घर के आँगन में

मैंने
चुन लिए, सहेज कर रख लिए कुछ
मुरझा गए रिश्तों की तरह